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योग का मूल मंत्र ‘पद्मासन’, तन और मन दोनों के लिए वरदान

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में समय कम और काम ज्यादा होता है, जिसके चलते मानसिक तनाव और एकाग्रता की कमी होना आम बात है। इस लगातार भागती दुनिया में, जहां हर व्यक्ति मानसिक शांति की तलाश में है, वहीं ‘पद्मासन’ एक ऐसा अचूक और प्राकृतिक योगासन है, जो बिना किसी तामझाम के हमारे शरीर और मस्तिष्क को गहरा आराम देने में मदद करता है। 

पद्मासन का नाम ‘पद्म’ शब्द पर रखा गया है, जिसका अर्थ होता है कमल का फूल। यह केवल एक शारीरिक मुद्रा नहीं, बल्कि आधुनिक जीवन की मानसिक थकान को दूर कर एकाग्रता की नई ऊर्जा भरने का एक दिव्य माध्यम भी है।

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने इसके लाभों पर टिप्पणी की है। मंत्रालय के अनुसार, पद्मासन एक स्थिर और सुखदायक ध्यानात्मक मुद्रा है, जो मन को शांत करने, एकाग्रता बढ़ाने और आंतरिक ऊर्जा को जागृत करने में अत्यंत प्रभावी है। यह योग अनुशासन का मूल आधार माना जाता है।

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यदि कोई व्यक्ति इस आसन का नियमित रूप से अभ्यास करता है, तो उसकी छाती, कंधों और हाथों में रक्त संचार बेहतर होता है, मेटाबॉलिज्म बढ़ता है और शरीर में प्राण ऊर्जा का संचार सुचारू रूप से होता है। यह योग साधकों के लिए आंतरिक शक्ति जागृत करने का प्रभावी तरीका माना जाता है।

इसे करना बेहद आसान है। इसके लिए सबसे पहले योगा मैट पर दंडासन की मुद्रा में बैठ जाएं। दाहिने घुटने को मोड़ें और दाहिने पैर को बायीं जांघ पर इस प्रकार रखें कि पैर का तलवा ऊपर की ओर रहे और एड़ी नाभि के पास हो। अब इसी तरह बाएं घुटने को मोड़ें और बाएं पैर को दाईं जांघ पर रखें। रीढ़ की हड्डी और गर्दन को बिल्कुल सीधा रखें। हाथों को घुटनों पर ज्ञान मुद्रा (तर्जनी और अंगूठे के पोरों को मिलाकर) में रखें। अभ्यास करते समय शरीर पर जबरदस्ती दबाव न डालें; इसे हमेशा अपनी क्षमता के अनुसार ही करें।

घुटनों, टखनों या कूल्हों में चोट या गंभीर दर्द होने पर इस आसन को करने से बचें। जबरदस्ती पैरों को मोड़ने या घुटनों को जमीन पर दबाने का प्रयास न करें।

Pic Credit : ANI

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