कहते हैं कि सच्चे प्रेम की डोर अटूट होती है, जिसे मौत भी अलग नहीं कर पाती।
मेदिनीनगर (पलामू) : पलामू जिले के पाटन प्रखंड अंतर्गत सगुना पंचायत में बुधवार की रात कुछ ऐसा ही मंजर देखने को मिला, जिसने हर किसी की आंखों को नम कर दिया। पूर्व मुखिया अखिलेश पांडे के घर से एक ही रात में दो अर्थियां निकलीं। पहले मां का साया सिर से उठा और उसके वियोग में महज तीन घंटे के भीतर पिता ने भी दम तोड़ दिया।
शोक में डूबा सगुना गांव
घटना के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार, पूर्व मुखिया अखिलेश पांडे की माता रूपनी देवी (75 वर्ष) पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थीं। बुधवार रात करीब 9:00 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। घर में मातम छा गया, लेकिन सबसे बड़ा आघात उनके पति योगेश्वर पांडे (95 वर्ष) को लगा। वह अपनी जीवनसंगिनी के जाने के गम को बर्दाश्त नहीं कर सके। पत्नी के निधन के ठीक तीन घंटे बाद, रात लगभग 12:00 बजे उन्होंने भी सदा के लिए अपनी आंखें मूंद लीं।
ग्रामीणों की जुबां पर ‘अटूट लगाव’ की चर्चा
एक ही रात में पति-पत्नी की मृत्यु की खबर गुरुवार सुबह जैसे ही क्षेत्र में फैली, पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया। ग्रामीणों का कहना है कि योगेश्वर पांडे और रूपनी देवी के बीच दशकों का अटूट साथ था। उम्र के इस पड़ाव पर भी दोनों एक-दूसरे का सहारा थे। लोगों ने भावुक होकर कहा, “यह संयोग नहीं, बल्कि उनके गहरे प्रेम का प्रतीक है कि मौत भी उन्हें जुदा नहीं कर पाई।”
नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई
गुरुवार को दोनों शवों का अंतिम संस्कार कुडवा जिन्जोई नदी के तट पर पूरे विधि-विधान के साथ किया गया। एक ही चिता की अग्नि के साथ दोनों पंचतत्व में विलीन हुए। इस दुखद घड़ी में शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा।
प्रमुख उपस्थित लोग:
- प्रशांत किशोर, युवा नेता (कांग्रेस)
- विभिन्न पंचायतों के जनप्रतिनिधि
- स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता और भारी संख्या में ग्रामीण
क्षेत्र में शोक की लहर
इस मार्मिक घटना के बाद से ही अखिलेश पांडे के आवास पर सांत्वना देने वालों का तांता लगा हुआ है। जनप्रतिनिधियों ने इसे परिवार के लिए अपूरणीय क्षति बताया और दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। सगुना समेत पूरे पाटन क्षेत्र में इस ‘अंतिम मिलन’ की चर्चा हो रही है।













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