रांची : झारखंड की राजधानी रांची में भ्रष्टाचार के एक बड़े मामले ने प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा दिया है। नगड़ी अंचल में जमीन के म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) के बदले 30 लाख रुपये की मोटी रिश्वत मांगने का गंभीर मामला प्रकाश में आया है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए रांची के उपायुक्त (DC) मंजूनाथ भजन्त्री ने कड़ा रुख अपनाया है और नगड़ी अंचल अधिकारी (CO) राजेश कुमार, संबंधित सर्किल इंस्पेक्टर (CI) और हल्का कर्मचारी को 48 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश जारी किया है।
जनता दरबार में खुली भ्रष्टाचार की पोल
यह पूरा मामला उपायुक्त के साप्ताहिक जनता दरबार के दौरान सामने आया। प्रार्थी आनंद सिंह और महेश्वर सिंह ने लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि उनकी जमीन के म्यूटेशन के बदले नगड़ी CO द्वारा 30 लाख रुपये की मांग की गई थी। शिकायतकर्ताओं की व्यथा सुनकर उपायुक्त ने तत्काल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से नगड़ी CO को लाइन पर लिया और भारी नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्हें कड़ी फटकार लगाई।
कोर्ट के आदेशों को भी किया गया दरकिनार
मामला बालालोंग मौजा के खाता संख्या 14, प्लॉट संख्या 470 की 1 एकड़ 5 डिसमिल जमीन से जुड़ा है। आवेदकों का आरोप है कि:
- आवेदन खारिज करना: CO ने पहले म्यूटेशन आवेदन (केस नंबर 7696/24-25) को खारिज कर दिया और 30 लाख रुपये की मांग की।
- LRDC कोर्ट की अवहेलना: जब आवेदक LRDC कोर्ट गए और वहां से उनके पक्ष में आदेश आया, तब CO ने कथित तौर पर ‘डिस्काउंट’ देते हुए रिश्वत की रकम 15 लाख रुपये कर दी।
- एडिशनल कलेक्टर का आदेश: मामला एडिशनल कलेक्टर के पास भी पहुँचा, जहाँ से म्यूटेशन करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया। इसके बावजूद CO अपनी मांग पर अड़े रहे और अंततः 9 लाख रुपये की अंतिम मांग रखी।
CNT-SPT एक्ट का गलत हवाला?
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू कानूनी तकनीकी का गलत इस्तेमाल है। आरोप है कि CO ने सीएनटी-एसपीटी एक्ट (CNT-SPT Act) का हवाला देकर आवेदन खारिज किया था। हालांकि, जमीन की डीड वर्ष 2010 की है, जबकि संबंधित कानूनी प्रावधान 2012 में प्रभावी हुए थे। उपायुक्त ने जब इस विसंगति पर सवाल किया, तो CO की ओर से ‘रिव्यू पिटीशन’ का तर्क दिया गया, जिसे उपायुक्त ने असंतोषजनक माना।
48 घंटे में मांगा जवाब
उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के मामले में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाएगी। उन्होंने CO राजेश कुमार सहित तीनों दोषी कर्मचारियों को शो-कॉज नोटिस जारी कर 48 घंटे में जवाब दाखिल करने को कहा है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई और निलंबन की अनुशंसा की जा सकती है।
”प्रशासन जनता की सेवा के लिए है, न कि उन्हें परेशान करने के लिए। म्यूटेशन जैसे कार्यों में लापरवाही और भ्रष्टाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” – मंजूनाथ भजन्त्री, उपायुक्त, रांची













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