मेदिनीनगर, (पलामू): पलामू जिले के पांकी थाना क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था और आवासीय विद्यालयों के प्रबंधन की एक हृदयविदारक तस्वीर सामने आई है। पांकी-मेदिनीनगर मुख्य पथ पर स्थित बसडीहा के चांदो आवासीय विद्यालय की एक 6 वर्षीय छात्रा की मौत निजी अस्पताल में इलाज के दौरान हो गई। इस घटना के बाद परिजनों में कोहराम मच गया है और स्थानीय स्तर पर निजी क्लीनिकों व आवासीय छात्रावासों की मनमानी के खिलाफ आक्रोश व्याप्त है।

क्या है पूरा मामला?
मृतक बच्ची की पहचान रतनपुर पंचायत के ग्राम इरगू (टोला तेतरखाड़) निवासी जियालाल उरांव की पुत्री अशरती कुमारी के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, अशरती बसडीहा स्थित चांदो आवासीय छात्रावास में रहकर पढ़ाई करती थी। अचानक तबीयत बिगड़ने पर उसे पांकी स्थित एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसकी मौत हो गई।
आरोपों के घेरे में अस्पताल और प्रबंधन
घटना के बाद से ही आरोपों का दौर शुरू हो गया है, जिससे मामला पेचीदा होता जा रहा है:
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- परिजनों व शिक्षकों का आरोप: विद्यालय के शिक्षकों का कहना है कि जब बच्ची को अस्पताल लाया गया, तब वहाँ मुख्य डॉक्टर (डॉ. बिरेन्द्र) उपस्थित नहीं थे। बच्ची का इलाज अस्पताल के ‘स्टाफ’ द्वारा किया जा रहा था। परिजनों का आरोप है कि गलत इलाज और डॉक्टर की अनुपस्थिति ने मासूम की जान ले ली।
- डॉक्टर का पलटवार: इधर, डॉक्टर बिरेन्द्र ने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए शिक्षक पर ही गंभीर आरोप मढ़े हैं। डॉक्टर का दावा है कि शिक्षक बच्ची को अस्पताल में छोड़कर भाग गए थे।
”बच्ची की मौत कैसे हुई और अस्पताल में उस वक्त कौन मौजूद था, यह अब जाँच का विषय है। लेकिन इन सबके बीच एक गरीब पिता ने अपनी लाडली को हमेशा के लिए खो दिया है।”
पांकी में ‘शिक्षा के नाम पर व्यवसाय’ सक्रिय
यह घटना केवल एक मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि पांकी क्षेत्र में कुकुरमुत्ते की तरह उगे दर्जनों निजी आवासीय विद्यालयों की पोल खोलती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि:
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- मूलभूत सुविधाओं का अभाव: इन छात्रावासों में सैकड़ों बच्चों को रखा जाता है, लेकिन न तो वहाँ शुद्ध पेयजल है और न ही रहने की स्वच्छ व्यवस्था।
- सुरक्षा और स्वास्थ्य में चूक: बीमार होने पर बच्चों को उचित चिकित्सा सुविधा देने के बजाय उन्हें झोलाछाप या गैर-अनुभवी स्टाफ के भरोसे छोड़ दिया जाता है।
- प्रशासनिक उदासीनता: पांकी में सक्रिय दर्जनों आवासीय विद्यालय बिना किसी कड़े मानकों के संचालित हो रहे हैं, जो सीधे तौर पर मासूमों के जीवन से खिलवाड़ है।
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जाँच की मांग
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जाँच की जाए। दोषी अस्पताल और लापरवाही बरतने वाले स्कूल प्रबंधन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में किसी और ‘अशरती’ को अपनी जान न गंवानी पड़े।













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