मेदिनीनगर, ( पलामू ) : रामनवमी के पावन पर्व पर पलामू जिले के तरहसी प्रखंड अंतर्गत आरका सुग्गी गांव में सांप्रदायिक सौहार्द की एक ऐसी तस्वीर देखने को मिली, जिसने न केवल क्षेत्र में बल्कि पूरे जिले में चर्चा बटोर ली है। यहां हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल पेश करते हुए मुस्लिम समुदाय के लोगों ने रामनवमी शोभायात्रा का भव्य स्वागत कर आपसी भाईचारे का संदेश दिया।
अहमद हुसैन की पहल बनी चर्चा का केंद्र
इस ऐतिहासिक और अनुकरणीय आयोजन के सूत्रधार स्थानीय निवासी अहमद हुसैन रहे। उन्होंने पूर्व में ही यह संकल्प लिया था कि इस बार की रामनवमी सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक बनेगी। अपनी सोच को धरातल पर उतारते हुए उन्होंने एक अभिनंदन सभा का आयोजन किया, जिसमें मुस्लिम समाज के दर्जनों लोग स्वेच्छा से शामिल हुए।
केसरिया गमछा और पगड़ी से हुआ स्वागत
जब गांव के प्रसिद्ध ठाकुरबाड़ी मंदिर से सप्तमी की भव्य शोभायात्रा निकली, तो दृश्य देखते ही बनता था। मुस्लिम समुदाय के लोग जुलूस के स्वागत के लिए कतारबद्ध होकर खड़े थे। जैसे ही श्रद्धालु आगे बढ़े, मुस्लिम भाइयों ने हिंदू श्रद्धालुओं को केसरिया गमछा पहनाया और पगड़ी भेंट कर उनका अभिनंदन किया। इस भावपूर्ण दृश्य को देख वहां मौजूद कई लोगों की आंखें नम हो गईं।
”इंसानियत” का संदेश गूंजा
कार्यक्रम के दौरान शांति और भाईचारे का संदेश देते हुए वहां नारे गूंजे— “ना हिंदू बनूंगा, ना मुसलमान बनूंगा, इंसान की औलाद हूं, इंसान बनूंगा।” यह उद्घोष पूरे माहौल को भावुक और सकारात्मक ऊर्जा से भर गया। स्थानीय निवासियों का कहना था कि आज के दौर में जब समाज को बांटने वाली खबरें आती हैं, तब इस तरह के आयोजन नफरत की दीवार गिराने का काम करते हैं।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने सराहा
इस अनूठे आयोजन में सामाजिक समरसता की मिसाल देख पुलिस और प्रशासन के अधिकारी भी गदगद दिखे। कार्यक्रम में मुख्य रूप से तरहसी थाना प्रभारी आनंद राम, एएसआई मृत्युंजय दुबे और अमलेश कुमार सिंह उपस्थित थे।
पंचायत के मुखिया बबन प्रसाद ने अहमद हुसैन की पीठ थपथपाते हुए कहा, “आरका सुग्गी गांव का यह प्रयास पूरे राज्य के लिए एक मिसाल है। अहमद हुसैन और उनकी पूरी टीम ने यह साबित कर दिया कि हम सब पहले इंसान हैं।”
इन्हें किया गया सम्मानित
आयोजन के अंत में सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने वाले लोगों को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में मुख्य आयोजक अहमद हुसैन के साथ भोला उर्फ शकील, गुड्डू नसीम, सैफ अंसारी, जुबैर हुसैन, असगर अली और यासीन अंसारी शामिल रहे। साथ ही, मंदिर समिति के पदाधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी स्मृति चिन्ह देकर कार्यक्रम को यादगार बनाया गया।
इस आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि तरहसी की मिट्टी में प्रेम और आपसी मेल-मिलाप की जड़ें कितनी गहरी हैं, जो किसी भी मजहबी दीवार से कहीं अधिक मजबूत हैं।













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