डिगबोई से भरत नायक पर दांव; ‘चाय बागान’ और ‘झारखंडी मूल’ के वोटबैंक पर टिकी पार्टी की निगाहें
रांची/गुवाहाटी : झारखंड में सत्ता की बागडोर संभाल रही झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने अब पूर्वोत्तर के राज्यों में अपना विस्तार करने की दिशा में एक बड़ा राजनीतिक कदम उठाया है। असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए JMM ने अपने प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी है। पार्टी ने शुरुआती चरण में 21 सीटों पर उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर यह साफ कर दिया है कि वह इस बार केवल उपस्थिति दर्ज कराने नहीं, बल्कि असम की राजनीति में एक निर्णायक शक्ति बनने के इरादे से मैदान में उतर रही है।
केंद्रीय प्रवक्ता ने किया नामों का ऐलान
पार्टी के केंद्रीय प्रवक्ता विनोद कुमार पांडेय ने आधिकारिक सूची जारी करते हुए कहा कि JMM असम में जल-जंगल-जमीन और हाशिए पर खड़े समुदायों की आवाज बनेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि पार्टी उन क्षेत्रों में विशेष ध्यान दे रही है जहाँ झारखंडी मूल के लोग और श्रमिक वर्ग वर्षों से रह रहे हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक और सामाजिक आकांक्षाएं अब तक अधूरी हैं।
डिगबोई से ‘नायक’ पर भरोसा
पहली सूची में सबसे चर्चित नाम भरत नायक का है, जिन्हें ऐतिहासिक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण डिगबोई विधानसभा सीट से प्रत्याशी बनाया गया है। डिगबोई, जो अपनी तेल रिफाइनरी और औद्योगिक इतिहास के लिए जाना जाता है, वहाँ श्रमिक वर्ग की बड़ी आबादी है। भरत नायक को मैदान में उतारकर JMM ने सत्ताधारी और विपक्षी दलों, दोनों के समीकरणों को चुनौती दे दी है।
चुनावी रणनीति: ‘झारखंडी पहचान’ और ‘आदिवासी कार्ड’
असम में बड़ी संख्या में ऐसे लोग रहते हैं जिनके पूर्वज दशकों पहले झारखंड के छोटानागपुर और संथाल परगना क्षेत्र से चाय बागानों में काम करने के लिए वहां बसे थे। JMM का मुख्य फोकस इन्हीं वोटबैंकों पर है:
- आदिवासी समुदाय: असम के चाय बागानों में काम करने वाले आदिवासियों के अधिकार।
- श्रमिक वर्ग: औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत मजदूरों की समस्याओं को मुद्दा बनाना।
- क्षेत्रीय विस्तार: झारखंड से बाहर अपनी पहचान को एक राष्ट्रीय पार्टी के रूप में स्थापित करना।
क्या होगा असम की राजनीति पर असर?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि JMM की एंट्री से असम के बहुकोणीय मुकाबले में नया मोड़ आ सकता है। विशेष रूप से ऊपरी असम और चाय बागान बेल्ट में, जहाँ JMM का पारंपरिक आधार (आदिवासी और पिछड़ा वर्ग) मजबूत है, वहां यह बड़ी पार्टियों के वोट बैंक में सेंध लगा सकती है।
“असम में हमारे पूर्वजों का खून-पसीना लगा है। झारखंड मुक्ति मोर्चा वहां के वंचितों और झारखंडी मूल के लोगों को उनका हक दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह 21 सीटें केवल शुरुआत हैं।”
— विनोद कुमार पांडेय, केंद्रीय प्रवक्ता, JMM













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