रांची: झारखंड विधानसभा की कार्यवाही के दौरान आज हटिया से भाजपा विधायक नवीन जायसवाल ने राज्य की एयर एम्बुलेंस सेवाओं में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार और निजी कंपनियों के साथ सांठगांठ का मामला जोरदार तरीके से उठाया। हाल ही में हुए ‘रेड बर्ड’ विमान हादसे का हवाला देते हुए विधायक ने सरकार को आड़े हाथों लिया।
सरकारी दफ्तर में निजी कंपनी का दबदबा?
विधायक जायसवाल ने सदन में जानकारी दी कि रांची एयरपोर्ट के पास स्थित सरकारी एयर एम्बुलेंस कार्यालय में निजी कंपनी ‘रेड बर्ड’ के बड़े-बड़े बोर्ड लगे हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि एक सरकारी दफ्तर में निजी कंपनी का इतना प्रभाव क्यों है? उन्होंने इसे अधिकारियों और निजी कंपनियों के बीच एक गहरे “खेल” का हिस्सा बताया।
जरूरतमंदों के साथ हो रहा है खिलवाड़
जायसवाल ने आरोप लगाया कि जब कोई गंभीर रूप से बीमार मरीज का परिजन सरकारी रियायती दर (लगभग 2.30 लाख रुपये) पर एयर एम्बुलेंस की मांग करने कार्यालय पहुँचता है, तो उसे ‘समय की कमी’ या ‘अनुपलब्धता’ का बहाना बनाकर टाल दिया जाता है। इसके बाद, उसी सरकारी कार्यालय से उन्हें निजी कंपनी ‘रेड बर्ड’ की सेवाएं लेने के लिए मजबूर किया जाता है, जिसके लिए करीब 8.30 लाख रुपये वसूले जाते हैं। विधायक के अनुसार, इस प्रक्रिया में प्रति मरीज करीब 6 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि का बंदरबांट हो रहा है।
स्थानीय बनाम बाहरी: रोजगार पर भी उठे सवाल
भ्रष्टाचार के आरोपों के साथ ही नवीन जायसवाल ने नियुक्तियों में हो रही अनियमितता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि एयर एम्बुलेंस सेवा से जुड़े करीब 50 कर्मचारियों में से एक भी व्यक्ति ‘मूलवासी’ या ‘झारखंडी’ नहीं है। उन्होंने कहा कि “झारखंडी” और “आदिवासी” हित की बात करने वाली सरकार के नाक के नीचे उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों को मनमाने ढंग से 50 हजार से 1 लाख रुपये प्रति माह के वेतन पर रखा गया है।
हादसे को लेकर जताई गहरी संवेदना
विधायक ने हाल ही में क्रैश हुए ‘रेड बर्ड’ एयर एम्बुलेंस की घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि अगर उस पीड़ित परिवार को समय पर सरकारी एयर एम्बुलेंस मिल जाती, तो शायद वे इस हादसे का शिकार होने से बच जाते। उन्होंने इसे सीधे तौर पर “अधिकारी-माफिया गठजोड़” की साजिश करार दिया।
सरकार से जांच की मांग
सदन में अपने वक्तव्य के अंत में नवीन जायसवाल ने स्वास्थ्य मंत्री और सरकार से इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की। उन्होंने पूछा कि सरकारी बेड़े में दो एयर एम्बुलेंस होने के बावजूद निजी कंपनी को इतनी छूट क्यों दी जा रही है?













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