मेदिनीनगर : पलामू जिले के लेस्लीगंज प्रखंड अंतर्गत हरतुआ पंचायत में सरकारी धन के बंदरबांट का एक बड़ा मामला प्रकाश में आया है। सरकार की महत्वाकांक्षी मनरेगा योजना, जिसका उद्देश्य ग्रामीणों को रोजगार देना और बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है, यहाँ भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती दिख रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में कई ऐसी योजनाएं हैं जिनका जमीन पर नामोनिशान नहीं है, लेकिन उनके नाम पर भारी-भरकम राशि की निकासी कर ली गई है।
सड़क का पता नहीं, निकल गए एक लाख से ज्यादा
मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू झरकटिया नहर से गणेश राम के घर होते हुए बकसखाप सिवाना तक प्रस्तावित मिट्टी-मोरम सड़क निर्माण से जुड़ा है। 2.99 लाख रुपये की इस स्वीकृत योजना को लेकर ग्रामीणों ने सनसनीखेज खुलासा किया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, जिस सड़क पर अब तक एक टोकरी मिट्टी भी नहीं डाली गई, उसके मद में 49,000 और 61,000 रुपये की दो किस्तों में निकासी की जा चुकी है। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि बिना कार्य प्रारंभ हुए भुगतान कैसे संभव हुआ?
पशुशेड निर्माण में भी भारी अनियमितता
गड़बड़ी की शिकायतें केवल सड़क तक सीमित नहीं हैं। पशुपालकों के लिए स्वीकृत पशुशेड योजनाओं में भी पारदर्शिता की धज्जियां उड़ाई गई हैं।
- झरकटिया: निवासी अशोक गिरी (वर्क कोड: 3405004003/1f/7080901387724) और सुदेश्वर गिरी (वर्क कोड: 3405004003/1f/7080901387725) के नाम से स्वीकृत शेड का निर्माण कार्य शुरू ही नहीं हुआ, जबकि वित्तीय हेराफेरी की बातें सामने आ रही हैं।
- लाभुकों की अनदेखी: हरतुआ के उपेंद्र राम, पचमो के प्रमोद तिवारी और उमेश यादव जैसे कई लाभुकों का कहना है कि उन्हें अब तक भुगतान नहीं मिला है। कुछ ग्रामीणों ने तो कर्ज लेकर खुद के खर्च पर शेड बनवा लिए, लेकिन सरकारी सहायता की राशि बिचौलियों या व्यवस्था की भेंट चढ़ गई।
मुखिया की सफाई: ‘जल्द शुरू होगा काम’
इन गंभीर आरोपों पर जब हरतुआ पंचायत के मुखिया अरविंद शुक्ला से पक्ष लिया गया, तो उन्होंने सड़क योजना में राशि निकासी की बात स्वीकार की। उन्होंने तर्क दिया कि कार्य जल्द ही शुरू कराया जाएगा। वहीं पशुशेड के मामले में उन्होंने कहा कि लाभुकों को सामग्री उपलब्ध करा दी गई है। उनके अनुसार, जमीन संबंधी विवाद के कारण निर्माण में देरी हुई है, जिसे जल्द ही सुलझा लिया जाएगा।
जांच की उठ रही मांग
भ्रष्टाचार के इन आरोपों ने प्रखंड प्रशासन की निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और मनरेगा लोकपाल से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
”यह गरीबों के हक पर डाका है। दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए और योजनाओं की वास्तविक स्थिति को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।” — स्थानीय ग्रामीण















Leave a Reply