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विदेश में नौकरी का सपना कहीं आपको न बना दे ‘साइबर स्लेव’, सरकार ने 4 हजार से अधिक लोगों को बचाया

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। देशभर में साइबर क्राइम के मामले हर दिन तेजी से बढ़ रहे हैं। साइबर अपराधी नए-नए तरीकों से लोगों के साथ ठगी कर रहे हैं। डिजिटल अरेस्ट, डीपफेक, ओटीपी, लॉटरी, रोमांस और कॉल स्पैम  जैसे स्कैम्स के जरिए लाखों-करोड़ों की ठगी की जा रही है। 

‘National Cyber Crime Reporting Portal’ (NCRP) के अनुसार, साइबर क्राइम के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। साल 2025 में साइबर क्राइम से जुड़े करीब 24 लाख केस सामने आए और 22,495 करोड़ की ठगी की गई। जबकि साल 2024 में 19,18,835 मामले सामने आए थे और 22,848 करोड़ रुपये की ठगी हुई थी। वहीं, साल 2023 में 13,10,357, साल 2022 में 6,94,446 और साल 2021 में 2,62,846 मामले सामने आए थे। 

एक तरफ जहां साइबर अपराधी लोगों को ठगने के नए तरीके निकाल रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ पकड़े न जाने के लिए भी वे अनोखे तरीके अपना रहे हैं। टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हुए ठग, विदेश में बैठकर ठगी कर रहे हैं। इसके लिए ठग, लोगों को ‘साइबर स्लेव’ तक बना रहे हैं। ‘साइबर स्लेवरी’ के हाल ही में सामने आए मामले और आंकड़े चिंताजनक और डराने वाले हैं। 

विदेश में अच्छी नौकरी और लाइफस्टाइल का झांसा देकर बेरोजगार लोगों को फंसाया जाता है। फिर उन्हें दूसरे देश में ले जाकर अपराध के इस दलदल में डाल दिया जाता है और ‘साइबर स्लेव’ बना दिया जाता है। इसके बाद उनसे जबरन साइबर अपराध करवाया जाता है। 

यूनाइटेड नेशंस की वेबसाइट पर 29 अगस्त 2023 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (ओएचसीएचआर) का कहना था कि दक्षिण पूर्व एशिया में लोगों को ‘साइबर स्लेव’ बनाया जा रहा है। इसके लिए कई आपराधिक गिरोह चलाये जा रहे हैं। ये गिरोह लोगों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं और उन्हें ‘साइबर स्लेव’ बनाकर हर साल अरबों डॉलर की कमाई करते हैं। ओएचसीएचआर ने म्यांमार में कम से कम एक लाख 20 हजार और कंबोडिया में एक लाख लोगों के, ऐसी स्थितियों में फंसे होने की संभावना जताई थी। लाओ पीडीआर, फिलीपींस और थाईलैंड में भी इस तरह की गतिविधियां की जाती हैं। ‘साइबर स्लेव’ के साथ बहुत ही बुरा व्यवहार किया जाता है। उनके मानवाधिकारों का  गंभीर उल्लंघन किया जाता है। उनके साथ मारपीट, यौन हिंसा और जबरदस्ती भी की जाती है। 

यूएस की नॉन गवर्नमेंट और नॉन प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन ‘यूनाइटेड स्टेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ पीस’ ने मई 2024 में साइबर घोटालों को लेकर एक रिपोर्ट जारी की थी। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 2023 में कंबोडिया में 12.5 बिलियन डॉलर, म्यांमार में 15.3 बिलियन डॉलर, लाओस में 10.9 बिलियन डॉलर, दुबई में 2.6 बिलियन डॉलर और चीन में 3.8 बिलियन डॉलर का ‘पिग- बुचरिंग’ स्कैम होने का अनुमान लगाया गया था। कंबोडिया में 12.5 बिलियन डॉलर से ज्यादा का स्कैम होने का अनुमान लगाया गया था, जो इसकी जीडीपी का आधा है। इस आंकड़े में कंबोडिया, म्यांमार और लाओस का पैसा मिला दिया जाए, तो यह तीनों देशों के संयुक्त जीडीपी का लगभग 40% है।

रॉयटर्स की वेबसाइट पर 11 फरवरी 2026 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, कंबोडिया के एक अधिकारी ने बताया है कि वहां करीब 200 स्कैम सेंटर्स को बंद किया गया है। इन स्कैम सेंटर्स पर दूसरे देशों के लोगों के साथ स्कैम किया जाता था। 173 अपराधियों को पकड़ा गया, 11,000 लोगों को बचाया गया और उन्‍हें वापस उनके देश भेजा गया। पकड़े गए लोगों को काफी बुरी स्थिति में रखा गया था और साइबर अपराध करने के लिए उन्‍हें मजबूर किया जा रहा था।

राज्य सभा में 5 फरवरी 2026 को विदेश मंत्रालय ने ‘साइबर स्लेव’ को लेकर पूछे गए सवाल पर जवाब देते हुए बताया कि म्यांमार, कंबोडिया और लाओ पीडीआर में साल 2025 में 4,315 लोगों को रेस्क्यू किया गया था। कंबोडिया से साल 2022 में 44, साल 2023 में 207, साल 2023 में 982 और 2025 में 1,300 लोगों को रेस्क्यू किया गया, जबकि लाओ पीडीआर से साल 2022 में 74, साल 2023 में 244, साल 2023 में 558 और 2025 में 1,421 लोगों का रेस्क्यू किया गया। म्यांमार का आंकड़ा अधिक रहा। म्यांमार से साल 2022 में 338, साल 2023 में 89, साल 2023 में 147 और 2025 में 1,594 लोगों को रेस्क्यू किया गया था।

राज्यसभा की एक रिपोर्ट के अनुसार, बेरोजगार युवाओं को फंसाने के लिए नौकरी का झांसा दिया जाता है। गूगल, फेसबुक, इंस्टाग्राम और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर नौकरी के विज्ञापन दिए जाते हैं। ऐसे युवाओं को निशाना बनाया जाता है, जिनकी भाषा पर अच्छी पकड़ होती है और साथ ही टेक्नोलॉजी की भी जानकारी होती है। इन लोगों से जॉब के लिए ट्रैवल के नाम पर भारी शुल्क वसूला जाता है। फिर बाद में शोषणकारी परिस्थितियों में डिजिटल धोखाधड़ी गतिविधियों में शामिल होने के लिए इन्‍हें मजबूर किया जाता है। इनका शारीरिक शोषण किया जाता है, पहचान से संबंधित दस्तावेजों को जब्त कर लिया जाता है और रिहाई के लिए फिरौती मांगी जाती है।

क्या होता है ‘साइबर स्लेव’?

साइबर ठग, पहले लोगों को अच्छी नौकरी का लालच देते हैं। विदेश में एक अच्छी लाइफस्टाइल का सपना दिखाते हैं। फिर वहां ले जाकर उन्हें बंधक बना लिया जाता है। उनके दस्तावेज और पासपोर्ट छीन लिए जाते हैं और उन्हें साइबर क्राइम करने के लिए मजबूर किया जाता है। प्लेटफॉर्म्स ‘डिजिटल अरेस्ट’, रोमांस स्कैम, फेक निवेश, फेक डेटिंग एप्स और ओटीपी फ्रॉड जैसे काम उनसे करवाए जाते हैं। मना करने पर उन्हें  शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। 

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लोगों को इस जाल में कैसे फंसाया जाता है? 

लुभावने विज्ञापन: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम और टेलिग्राम पर नौकरी के लुभावने विज्ञापन दिए जाते हैं।

जॉब: विदेश में जॉब और अच्छी सैलरी का वादा किया जाता है।

फर्जी एजेंट: फर्जी एजेंट बनकर कॉल किया जाता है। विदेश में नौकरी दिलाने की बात कही जाती है। साथ ही, भरोसा दिलाया जाता है कि उनका आने-जाने का सारा खर्चा कंपनी देगी। 

टूरिस्ट वीजा: लोगों को फंसाकर टूरिस्ट वीजा पर भी लाया जाता है।

खुद को इस जाल से कैसे बचाएं?

नौकरी के विज्ञापनों पर गौर करें। अगर कोई विज्ञापन जरूरत से ज्यादा अच्छा लग रहा है और ढेरों ऑफर दे रहा है, तो पर उस संदेह करें। किसी भी लिंक पर क्लिक कर अपनी निजी जानकारी शेयर न करें। 

अगर कोई एजेंट बनकर नौकरी का झांसा दे रहा है, तो उसकी जांच करें। सरकार की ओर से जो मान्यता प्राप्त रिक्रूटमेंट एजेंट हैं, उन्हीं पर भरोसा करें। एजेंट के बारे में और कंपनी के बारे में जांच लें। कंपनी के परमिट के बारे में भी चेक करें।

टूरिस्ट वीजा पर विदेश में नौकरी करने के लिए न जाएं। ऐसा करना खतरनाक साबित हो सकता है। वर्क वीजा के लिए ही अप्लाई करें। 

भारत सरकार के ‘eMigrate‘ पोर्टल पर जाकर एजेंट के बारे में पता करें। अगर एजेंट ऑथराइज्ड होगा तो उसकी जानकारी वहां मौजूद होगी। साथ ही, नकली एजेंट, एजेंसी और स्कैम करने वाली वेबसाइट के बारे में भी यहां जानकारियां दी गई होती हैं। 

किसी भी कंपनी को ज्वाइन करने से पहले उसके डिजिटल फुटप्रिंट की जरूर जांच कर लें। कंपनी के ऑफिशियल ईमेल की जांच करें। देखें कि यह कंपनी की आधिकारिक आईडी है या नहीं। कंपनी के पते को गूगल मैप्स पर देखें। उसकी फोटो को गूगल मैप पर जांचें। यह भी जांचें कि क्या वह कोई रिमोट इलाका या जंगल के बीच बनी कोई बिल्डिंग तो नहीं है?

सोशल मीडिया पर कंपनी के बारे में जांचें। लिंक्डइन पर उसके कर्मचारियों को साथ जुड़ें और उनसे बात करने की कोशिश करें।

अपने सारे दस्तावेज अपने पास रखें। इन्हें किसी को न दें। अगर आपका एजेंट आपसे पासपोर्ट मांग रहा है, तो समझ जाएं कि कोई न कोई समस्या है। कोई भी कंपनी कानूनन आपका पासपोर्ट जब्त नहीं कर सकती है।

अपने सारे दस्‍तावेजों और पहचान पत्र का बैकअप बनाकर अपने पास रखें। पासपोर्ट, वीजा, ऑफर लेटर और आईडी की फोटो खींचकर Google Drive या iCloud पर रखें और परिवार के साथ भी इन्हें शेयर करें।

विदेश पहुंचने के बाद अपने परिवारजनों के संपर्क में रहें। उन्हें अपने बारे में जानकारी देते रहें। अपनी लाइव लोकेशन उनके साथ शेयर करें। अपने परिवार के साथ एक ‘सीक्रेट कोड’ तैयार कर लें, जिसे भेजने पर वे समझ जाएं कि आप परेशानी या किसी खतरे में फंसे हैं। 

आप जिस देश भी जा रहे हैं, वहां के भारतीय दूतावास की जानकारी पहले ही सर्च करके निकाल लें, ताकि इमरजेंसी में वह आपके काम आ सके। दूतावास का एड्रेस से लेकर फोन नंबर तक, नोट करके अपने पास संभालकर रख लें। 

अगर आप किसी तरह का भुगतान कर रहे हैं, तो उसे नगद में न करें। बैंक ट्रांसफर का ऑप्शन ही चुनें, ताकि आपके पास ट्रांजेक्शन का सबूत मौजूद रहे। 

अगर एजेंट आपसे भारत सरकार की ओर से तय की गई फीस से ज्यादा मांग रहा है, तो उसे भुगतान न करें और सावधान रहें।

 


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