देहरादून : उत्तराखंड के न्यायालय परिसरों को बम से उड़ाने की हालिया धमकियों ने पुलिस प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। प्रदेश में कानून-व्यवस्था की संवेदनशीलता को देखते हुए, पुलिस महानिदेशक (DGP) दीपम सेठ ने राज्य के सभी न्यायालयों की सुरक्षा व्यवस्था को नए सिरे से चाक-चौबंद करने के लिए विस्तृत गाइडलाइन जारी की है।
पुलिस मुख्यालय (PHQ) द्वारा पहले ही सभी जनपदों के न्यायालयों का सुरक्षा ऑडिट कराने का आदेश दिया गया था, लेकिन अब सुरक्षा को ‘अभेद्य’ बनाने के लिए अतिरिक्त कड़े कदम उठाए गए हैं।
एक्सेस कंट्रोल और पहचान पत्र अनिवार्य
DGP दीपम सेठ के निर्देशों के अनुसार, अब किसी भी अनाधिकृत व्यक्ति का न्यायालय परिसर में प्रवेश नामुमकिन होगा।
- ID चेक: सभी प्रवेश और निकासी द्वारों पर संबंधित अधिकारियों से समन्वय कर ‘आईडेंटिटी कार्ड’ के आधार पर ही प्रवेश सुनिश्चित किया जाएगा।
- स्क्रीनिंग: परिसरों में बैरियर लगाए जाएंगे और आने-जाने वाले हर व्यक्ति की गहन स्क्रीनिंग की जाएगी। इस कार्य के लिए स्थानीय अभिसूचना इकाई (LIU) और अतिरिक्त पुलिस बल को तैनात किया गया है।
ATS और बम स्क्वाड संभालेंगे मोर्चा
आतंकवादी घटनाओं और बम हमलों की आशंका को देखते हुए सुरक्षा के स्तर को कई गुना बढ़ा दिया गया है:
- सुबह की चेकिंग: न्यायालय की कार्यवाही शुरू होने से पहले प्रतिदिन प्रातः काल में बम डिस्पोजल दस्ता (BDDS) और डॉग स्क्वाड पूरे परिसर का एंटी-सबोटॉज (AS) चेक करेंगे।
- स्पेशल यूनिट्स: संवेदनशील न्यायालय परिसरों में Quick Response Team (QRT) और ATS की टीमों को मुस्तैद रहने का आदेश दिया गया है।
तकनीकी निगरानी और मॉक ड्रिल
सुरक्षा केवल जवानों के भरोसे नहीं, बल्कि आधुनिक उपकरणों के जरिए भी की जाएगी। मुख्यालय ने निर्देश दिए हैं कि न्यायालय परिसर में लगे हर CCTV कैमरे की चौबीसों घंटे मॉनिटरिंग की जाए। इसके साथ ही, आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए समय-समय पर मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी और एक प्रभावी ‘इमरजेंसी एग्जिट प्लान’ (निकासी योजना) तैयार रखा जाएगा।
पुलिस बल की सतर्कता पर जोर
DGP ने स्पष्ट किया है कि न्यायाधीशों और न्यायालयों की सुरक्षा में पहले से तैनात कर्मियों को वर्तमान सुरक्षा परिदृश्य के प्रति सतर्क किया गया है। पुलिस और पीएसी (PAC) बल की तैनाती पर्याप्त संख्या में की जाएगी और ड्यूटी पर तैनात कर्मियों की भी नियमित रूप से आकस्मिक चेकिंग होगी।
”न्यायालय परिसरों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी तरह की धमकी को हल्के में नहीं लिया जा रहा है। हमने सभी कप्तानों को निर्देश दिए हैं कि सुरक्षा घेरा इतना मजबूत हो कि परिंदा भी पर न मार सके।”
— दीपम सेठ, DGP, उत्तराखंड
इस सुरक्षा अभियान के बाद, अब उत्तराखंड के न्यायालय परिसरों में आने वाले वादकारियों, वकीलों और कर्मचारियों को कड़ी सुरक्षा जांच से गुजरना होगा, जिससे भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके।














Leave a Reply