मेदिनीनगर : पलामू प्रमंडल के हृदयस्थली मेदिनीनगर में नगर निगम चुनाव का पारा चढ़ते ही सियासी समीकरण बदलने लगे हैं। इस बार चुनावी दंगल में सबसे अधिक चर्चा नगर निगम अध्यक्ष पद की प्रत्याशी आयशा सिंह किन्नर की हो रही है। आयशा का चुनाव प्रचार न केवल लोगों का ध्यान खींच रहा है, बल्कि उनके बेबाक और ‘बोल्ड’ तेवरों ने स्थापित राजनीतिज्ञों की नींद उड़ा दी है।
गली-कूचों में गूँज रहा ‘हिसाब दो’ का नारा
आयशा सिंह किन्नर का चुनाव प्रचार पारंपरिक प्रचारों से बिल्कुल अलग है। वे न केवल हाथ जोड़कर आशीर्वाद मांग रही हैं, बल्कि पिछले कार्यकाल के अधूरे वादों और शहर की बदहाली पर सीधे सवाल भी दाग रही हैं। जनसभाओं और घर-घर जनसंपर्क के दौरान आयशा का एक ही सुर है— “अब तक जिन्हें मौका दिया, उन्होंने क्या किया? अब जनता को हिसाब चाहिए।”
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि आयशा की स्पष्टवादिता उन्हें दूसरों से अलग खड़ा करती है। शहर की चरमराई सफाई व्यवस्था, शुद्ध पेयजल का अभाव और सड़कों की जर्जर हालत को लेकर वे सीधे तौर पर निगम प्रशासन और पूर्व प्रतिनिधियों को कटघरे में खड़ा कर रही हैं।
क्यों भा रहा है लोगों को आयशा का अंदाज?
आयशा सिंह की बढ़ती लोकप्रियता के पीछे कई अहम कारण माने जा रहे हैं:
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- भावनात्मक जुड़ाव: एक किन्नर प्रत्याशी होने के नाते लोग उन्हें दुआओं और स्नेह का प्रतीक मान रहे हैं।
- निडर संवाद: बिना किसी राजनीतिक दबाव के वे भ्रष्टाचार और विकास कार्यों में हो रही देरी पर खुलकर बोल रही हैं।
- वंचितों की आवाज: समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों के बीच आयशा एक मसीहा के रूप में उभर रही हैं।
”मैं यहाँ राज करने नहीं, बल्कि बरसों से उपेक्षित अपने शहर की सेवा करने आई हूँ। लोग वादे करते हैं, मैं हक माँगने निकली हूँ। जनता जाग चुकी है और अब वह खोखले वादों पर नहीं, बल्कि काम पर वोट देगी।” — आयशा सिंह किन्नर, प्रत्याशी
बदल सकते हैं चुनावी समीकरण
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मेदिनीनगर में आयशा सिंह की सक्रियता ने मुख्यधारा की पार्टियों के लिए चुनौती पेश कर दी है। यदि जनता का यह झुकाव वोट में तब्दील होता है, तो इस बार का परिणाम चौंकाने वाला हो सकता है। फिलहाल, मेदिनीनगर की गलियों में आयशा के ‘बोल्ड’ अंदाज की चर्चा चाय की दुकानों से लेकर चौक-चौराहों तक आम है।













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