मेदिनीनगर : पलामू जिले के पांकी प्रखंड अंतर्गत द्वारिका ग्राम में महाशिवरात्रि का उल्लास उस वक्त चीख-पुकार में बदल गया, जब मेले में गोलगप्पे खाने से दर्जनों बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। दूषित खाद्य पदार्थ (Food Poisoning) के सेवन से बीमार होने वाले बच्चों में स्थानीय ग्रामीणों के अलावा पास के ईंट भट्ठों पर काम करने वाले मजदूरों के बच्चे भी शामिल हैं। समाचार लिखे जाने तक कुछ बच्चों की स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है।
मेले की खुशी मातम में बदली
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, द्वारिका शिव मंदिर परिसर में महाशिवरात्रि के अवसर पर भव्य मेले का आयोजन किया गया था। मेले में स्थित एक गोलगप्पे के स्टॉल पर बच्चों ने बड़े चाव से चाट-पकोड़े और गोलगप्पे खाए। खाने के कुछ ही देर बाद बच्चों को पेट दर्द, उल्टी और जी मिचलाने की शिकायत होने लगी। देखते ही देखते बीमार बच्चों की संख्या बढ़ने लगी और वहां अफरा-तफरी का माहौल कायम हो गया।
मजदूरों के बच्चों की स्थिति चिंताजनक
पीड़ितों में सबसे दयनीय स्थिति उन गरीब मजदूरों के बच्चों की है जो पास के ईंट भट्ठों पर कार्यरत हैं। आर्थिक रूप से अक्षम होने के कारण ये परिवार निजी अस्पतालों में इलाज कराने में असमर्थ हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि स्वास्थ्य विभाग ने समय रहते सुध नहीं ली, तो स्थिति भयावह हो सकती है।
इस घटना की खबर सुनते ही कांग्रेस ओबीसी प्रदेश उपाध्यक्ष सह समाजसेवी निरंजन यादव ने तत्काल स्वास्थ्य विभाग एवं प्रशासन से समुचित इलाज करने की मांग की है साथ ही दूषित गोलगप्पा बेचने वाले गोलगप्पा विक्रेता का जांच कर कानूनी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है जिससे आने वाले समय में ऐसी घटना का पुर्नवृत्ति ना हो
”हमें शक है कि गोलगप्पे वाले ने पानी या मसाले में किसी घातक केमिकल का प्रयोग किया है। बच्चों की हालत देख डर लग रहा है, प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।”
— स्थानीय ग्रामीण
स्वास्थ्य विभाग की सुस्ती पर आक्रोश
स्थानीय लोगों में स्वास्थ्य विभाग के प्रति भारी रोष देखा जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि घटना की सूचना के घंटों बाद भी स्वास्थ्य विभाग की कोई मेडिकल टीम गांव नहीं पहुंची थी। ग्रामीण अपने स्तर पर प्राथमिक उपचार की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों और एम्बुलेंस की कमी साफ खल रही है।
मुख्य बिंदु:
- स्थान: द्वारिका ग्राम (शिव मंदिर मेला), पांकी।
- कारण: मेले में गोलगप्पे खाने से फूड पॉइजनिंग की आशंका।
- प्रभावित: दर्जनों बच्चे, जिनमें ईंट भट्ठा मजदूरों के बच्चे भी शामिल।
- मांग: मेडिकल टीम की तत्काल तैनाती और खाद्य सामग्री की जांच।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इन मासूमों की जान बचाने के लिए कितनी तत्परता दिखाता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि दोषी गोलगप्पा विक्रेता के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए और उसके द्वारा इस्तेमाल किए गए मसालों की लैब जांच कराई जाए।













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