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झारखंड नगर निकाय चुनाव: 23 फरवरी को थमेगा कामकाज, मतदान के लिए सार्वजनिक अवकाश घोषित; प्रत्याशियों की धड़कनें तेज

​रांची : झारखंड में स्थानीय सरकार के गठन का इंतजार अब खत्म होने को है। राज्य के 48 नगर निकायों में आगामी 23 फरवरी 2026 को होने वाले मतदान को लेकर सरगर्मी चरम पर है। इस बीच, राज्य सरकार ने मतदान के दिन सार्वजनिक अवकाश (Public Holiday) की घोषणा कर दी है, जिसने चुनावी मैदान में उतरे प्रत्याशियों और मतदाताओं के बीच हलचल बढ़ा दी है।

​वोटिंग के दिन बंद रहेंगे दफ्तर, जारी हुई अधिसूचना

​कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट, 1881 की धारा 25 के तहत दी गई शक्तियों का प्रयोग करते हुए सरकार ने उन तमाम क्षेत्रों में छुट्टी का ऐलान किया है जहाँ मतदान होना है।

  • ​क्या बंद रहेगा: सभी सरकारी कार्यालय, सार्वजनिक प्रतिष्ठान और बैंक।
  • ​उद्देश्य: यह सुनिश्चित करना कि कामकाजी वर्ग का कोई भी मतदाता आधिकारिक व्यस्तता के कारण अपने लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित न रहे।
  • ​प्रशासन का संदेश: निर्भय होकर और ‘फ्री माइंड’ से अधिक से अधिक संख्या में बूथों तक पहुँचें।

​प्रत्याशियों की क्यों उड़ी है नींद?

​वोटिंग की तारीख नजदीक आते ही और छुट्टी की घोषणा के बाद उम्मीदवारों की चिंता बढ़ गई है। इसके पीछे मुख्य कारण वोटिंग प्रतिशत है। प्रत्याशियों को डर है कि लंबी छुट्टी का लाभ उठाकर कहीं मतदाता ‘पिकनिक मोड’ में न चले जाएं, जिससे चुनावी गणित बिगड़ सकता है। अब प्रत्याशी घर-घर जाकर न केवल वोट मांग रहे हैं, बल्कि लोगों से छुट्टी का सदुपयोग मतदान के लिए करने की अपील भी कर रहे हैं।

​बुनियादी सुविधाओं की बहाली की उम्मीद

​पिछले लंबे समय से नगर निकायों में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के न होने से शहरों की विकास गति थमी हुई थी। सफाई, जल आपूर्ति, स्ट्रीट लाइट और सड़कों जैसे बुनियादी मुद्दे अब इस चुनाव के केंद्र में हैं। जनता को उम्मीद है कि 23 फरवरी के बाद शहरों में ‘अपनी सरकार’ होगी, जिससे नौकरशाही के बजाय सीधे जनभावनाओं के अनुरूप फैसले लिए जा सकेंगे।

​लोकतंत्र का उत्सव: जनता की बारी

​यह चुनाव झारखंड के शहरी विकास की नई पटकथा लिखेगा। जानकारों का मानना है कि इस बार मतदाताओं में भारी उत्साह है, क्योंकि स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक जवाबदेही तय करने का यह सबसे बड़ा अवसर है।

​”मतदान केवल एक अधिकार नहीं, बल्कि शहर के भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी है। 23 फरवरी को आपका एक वोट तय करेगा कि आपके शहर का अगला 5 साल कैसा होगा।”

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