बिहार में विधान परिषद चुनावों ने नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यू के लिए चिंता बढ़ा दी है। सीटों के लिहाज से देखेंगे तो चिंता समझ में नहीं आएगी। पार्टी के नेता कह भी रहे हैं कि पिछले चुनाव में यानी 2020 में भी इन आठ सीटों में से जदयू को सिर्फ एक सीट मिली थी। पटना स्नातक सीट पर उसके उम्मीदवार नीरज कुमार जीते थे और इस बार भी नीरज कुमार इस सीट से जीत गए हैं। यानी जदयू ने अपनी सीट बरकरार रखी है। हां, यह जरूर है कि पार्टी अतिरिक्त सीट नहीं जीत पाई। उनका कहना है कि विधानसभा चुनाव में इतना शानदार प्रदर्शन करने और सारी स्थितियां अनुकूल रहने के बावजूद जदयू एक से ज्यादा सीट नहीं जीत पाई यह सोचने वाली बात है लेकिन चिंता की बात नहीं है। हालांकि जब नतीजे की बारीकी में जाएंगे तो जदयू के लिए चिंता की बात दिखेगी। यह साफ दिख रहा है कि उसका कोर वोट आधार टूट रहा है।
उसकी सबसे पहली चिंता तो यह होनी चाहिए कि जब एनडीए के लिए अनुकूल माहौल है, जिसमें भाजपा अपने कोटे की चार में से तीन सीटें जीत जाती है तो जदयू सिर्फ एक ही सीट क्यों जीत पाई? गौरतलब है कि भाजपा ने सिर्फ एक सीट पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की गंवाई है। उसके लिए भी यह चिंता की बात है क्योंकि यह सीट उसके पास पिछले 30 साल से थी। इस सीट पर उसके सबसे कोर वोट यानी भूमिहारों ने उसका साथ छोड़ दिया और राजद के भूमिहार उम्मीदवार को जीता दिया। फिर भी उसने तीन सीटें जीती हैं। तिरहुत शिक्षक, दरभंगा स्नातक और कोशी शिक्षक क्षेत्र से उसे जीत मिली है। जबकि जनता दल यू का उम्मीदवार सिर्फ पटना स्नातक में जीता। सारण शिक्षक, तिरहुत स्नातक और दरभंगा शिक्षक में उसे हार मिली। दरभंगा शिक्षक सीट पर तो जनता दल यू का उम्मीदवार चौथे स्थान पर चला गया। यह इसलिए चिंता की बात है क्योंकि विधानसभा चुनाव के बाद दूसरी बार विधान परिषद चुनाव में जदयू ने खराब प्रदर्शन किया है। इससे पहले भोजपुर में स्थानीय निकाय वाले निर्वाचन क्षेत्र में जदयू ने अपनी सीट उपचुनाव में गंवा दी थी।
बहरहाल, जदयू के लिए इससे बड़ी चिंता की बात पटना स्नातक में कुर्मी वोट टूटने का है। पटना स्नातक में जदयू ने नीरज कुमार को टिकट दिया था। वे जीत गए हैं। लेकिन पटना और नालंदा के कुर्मी मतदाताओं ने तेजस्वी यादव की राजद के उम्मीदवार दिलीप पटेल को वोट किया। तभी दिलीप पटेल दूसरे स्थान पर रहे और कांटे की टक्कर दी। सोचें, नीतीश कुमार ने नीरज को टिकट दिया और निशांत कुमार नामांकन कराने व वोट मांगने गए, फिर भी कुर्मी मतदाताओं ने उम्मीदवार की जाति देख कर वोट किया। उनको राजद के साथ जाने में भी परहेज नहीं रहा। नालंदा और पटना में सामाजिक स्तर पर भी कुर्मी बनाम यादव का तनाव रहता है। फिर भी दिलीप पटेल को जम कर वोट पड़े। उनको यादव और मुस्लिम का एकतरफा वोट मिला। जदयू के लिए चिंता की बात यह भी है कि पटना स्नातक सीट के कारण ही पार्टी में विवाद हुआ। मोकामा के विधायक अनंत सिंह ने जनसुराज का समर्थन किया, जिसकी वजह से उनको पार्टी से निकाला गया। इससे मगध के क्षेत्र में भूमिहार और कोईरी, कुर्मी का आपसी समीकरण प्रभावित होगा। बिहार के दूसरे क्षेत्रों में भी अनंत सिंह के कारण भूमिहारों ने जदयू को छोड़ा। सारण सीट पर जदयू को हराने के लिए भूमिहार निर्दलीय राहुल राज के साथ चले गए तो दरभंगा शिक्षक में उन्होंने जनसुराज के सुरेश राय को वोट किया।












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