उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव और उसके दो साल बाद होने वाले लोकसभा चुनाव में भाजपा के सामने विपक्ष की चुनौतियों और 15 साल की सत्ता विरोधी लहर के साथ साथ एक चुनौती पार्टी के अंदर से भी मिलेगी। पार्टी के अंदर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे पुराने नेताओं की संख्या बढ़ती जा रही है। अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन में शामिल रहे नेता एक बार फिर चुनाव मैदान में उतरना चाहते हैं। ऐसे नेता, जिनको पिछले चुनाव में टिकट नहीं मिली थी या पिछले कई चुनावों से टिकट नहीं मिल रही थी वे अगला चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। कई नेताओं ने अभी से अपनी दावेदारी की घोषणा कर दी है। हालांकि पार्टी के नेता अभी इसे ज्यादा गंभीर नहीं मान रहे हैं लेकिन जानकार नेताओं का कहना है कि यह सिरदर्द बनने वाला है।
इस मामले में ताजा नाम विनय कटियार का है। उन्होंने पार्टी से कहा है कि वे चुनाव लड़ेंगे। जानकार सूत्रों का कहना है कि वे अयोध्या से विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं और अगर पार्टी उनको विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ाती है तो फिर वे यह गारंटी चाहते हैं कि 2029 के लोकसभा चुनाव में उनको फैजाबाद से मैदान में उतारा जाए। गौरतलब है कि फैजाबाद सीट में ही अयोध्या का क्षेत्र आता है और पिछले चुनाव में भाजपा इस सीट पर हार गई थी। समाजवादी पार्टी ने इस सामान्य सीट से दलित समाज के अवधेश प्रसाद को उतारा था और उन्होंने भाजपा के लल्लू सिंह को हरा दिया था। गौरतलब है कि अयोध्या राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी के बाद से अयोध्या का मामला भी भाजपा के लिए भारी दिख रहा है। तभी सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चुनौती दी थी कि वे अय़ोध्या से चुनाव लड़ें। विनय कटियार ने इस सीट पर दावा किया है। माना जा रहा है कि उनके लड़ने से भाजपा के लिए यह सीट आसान हो जाएगी। इसका कारण यह है कि वे आंदोलन में शामिल रहे हैं और उन्होंने चढ़ावा चोरी पर खुल कर बड़े लोगों के खिलाफ बयान दिया था। उन्होंने यह भी कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनको फोन किया था।
बहरहाल, मंदिर आंदोलन में शामिल रहीं मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती भी इस बार चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही हैं। वे पिछले दो चुनाव से नहीं लड़ रही हैं। 2014 में वे उत्तर प्रदेश की झांसी सीट से सांसद बनीं थीं औऱ नरेंद्र मोदी की पहली सरकार में जल संसाधन मंत्री बनी थीं। हालांकि उसके बाद सेहत खराब होने के हवाले वे चुनाव से दूर रहीं। इस बार उन्होंने ऐलान किया है कि वे लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे। हालांकि यह नहीं बताया है कि वे मध्य प्रदेश की किसी सीट से लड़ेंगी या उत्तर प्रदेश से। मंदिर आंदोलन से अलग अयोध्या, फैजाबाद, बस्ती, गोंडा के इलाके में असर रखने वाले बाहुबली नेता ब्रजभूषण शरण सिंह भी अगली बार चुनाव लड़ना चाहते हैं। पिछली बार हरियाणा की महिला पहलवानों के यौन शोषण विवाद की वजह से वे चुनाव नहीं लड़े थे। पार्टी ने उनके बेटे करण भूषण सिंह को उनकी जगह टिकट दिया था। वे जीत भी गए थे। अब ब्रजभूषण शरण सिंह निचली अदालत से बरी हो गए हैं। उन्होंने दावा किया है कि कम से कम एक बार और उनको सांसद बनना है। इस बार राज्यसभा चुनाव में तो यह चर्चा हो गई थी कि वे सपा के तीसरे उम्मीदवार हो सकते हैं। हालांकि वे नहीं लड़े। अगले लोकसभा चुनाव में वे पार्टी के लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हैं।












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