मेदिनीनगर,( पलामू ): जिले में बाल श्रम के समूल खात्मे को लेकर प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई की है। श्रम अधीक्षक अमित कुमार चौधरी के नेतृत्व में बुधवार को पलामू जिले के हरिहरगंज एवं पिपरा प्रखंड क्षेत्रों में बाल श्रम उन्मूलन को लेकर एक विशेष जांच एवं सघन छापेमारी अभियान चलाया गया। इस अभियान के दौरान विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से कुल 8 बाल श्रमिकों को सफलतापूर्वक मुक्त कराया गया।
होटल और ढाबों में कराया जा रहा था कार्य, 8 से 13.5 वर्ष है उम्र
श्रम अधीक्षक से मिली जानकारी के अनुसार, मुक्त कराए गए इन मासूम बच्चों से स्थानीय होटलों एवं ढाबों में वेटर का कार्य, जूठे प्लेट उठाने तथा साफ-सफाई जैसे कड़े और अमानवीय कार्य कराए जा रहे थे। छुड़ाए गए बच्चों की उम्र लगभग 8 वर्ष से 13.5 वर्ष के बीच आंकी गई है, जो उनके खेलने-कूदने और पढ़ने की उम्र है।
दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज; कानून में है कड़ी सजा का प्रावधान
श्रम अधीक्षक श्री चौधरी ने सख्त लहजे में बताया कि ‘बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986’ के तहत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी प्रतिष्ठान में कार्य कराना एक गंभीर और दंडनीय अपराध है। इस कानून के तहत दोषी नियोजकों (मालिकों) के विरुद्ध 6 महीने से लेकर 2 वर्ष तक की जेल की सजा अथवा 20 हजार रुपये से लेकर 50 हजार रुपये तक का जुर्माना, या फिर दोनों का कड़ा प्रावधान है।
इसी कड़ी में, नियमों का उल्लंघन कर बाल श्रमिकों को काम पर रखने वाले होटल और ढाबा संचालकों के विरुद्ध हरिहरगंज एवं पिपरा थाना में नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई है।
शिक्षा और पुनर्वास की जिम्मेदारी उठाएगा प्रशासन
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बच्चों को केवल मुक्त कराने तक ही यह मुहिम सीमित नहीं रहेगी। श्रम अधीक्षक ने कहा कि मुक्त कराए गए सभी बच्चों का विद्यालय में अनिवार्य रूप से नामांकन कराया जाएगा ताकि वे शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ सकें। इसके साथ ही, बच्चों के परिवारों के सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास की कार्रवाई भी जिला प्रशासन द्वारा सुनिश्चित की जाएगी।
अभियान में शामिल रही संयुक्त टीम
बाल श्रम उन्मूलन के इस बड़े अभियान में श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी (हरिहरगंज, हुसैनाबाद एवं सदर-मेदिनीनगर) के साथ-साथ जिला समन्वयक (अग्रगति पलामू) एवं अन्य संबंधित कर्मी व पुलिस बल मुख्य रूप से मुस्तैद रहे।
“बाल श्रम केवल एक कानूनी अपराध ही नहीं, बल्कि मासूमों के मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन भी है। बच्चों का सही स्थान कोई कार्यस्थल या होटल-ढाबा नहीं, बल्कि विद्यालय की कक्षा है। समाज के उज्ज्वल और सुरक्षित भविष्य के लिए हम सभी नागरिकों को बाल श्रम के विरुद्ध जागरूक एवं संवेदनशील होने की अत्यंत आवश्यकता है।”
“श्रम अधीक्षक पलामू “













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