रांची/चाईबासा : झारखंड में लाल आतंक के खिलाफ सुरक्षाबलों को अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी हाथ लगी है। राज्य सरकार की ‘आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति’ से प्रभावित होकर पहली बार इतनी बड़ी संख्या में नक्सलियों ने एक साथ अपने हथियार डाल दिए और हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। आत्मसमर्पण करने वाले इन नक्सलियों में कई बड़े इनामी, पुरुष और महिला कैडर्स शामिल हैं, जो लंबे समय से कोल्हान और आस-पास के इलाकों में सक्रिय थे।
सुरक्षाबलों की संयुक्त रणनीति रंग लाई
इस ऐतिहासिक कामयाबी के पीछे झारखंड पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और झारखंड जगुआर की महीनों की संयुक्त रणनीति और कड़ा परिश्रम रहा है। चाईबासा के पुलिस अधीक्षक अमित रेणु के नेतृत्व में सुरक्षाबलों ने न केवल नक्सलियों के खिलाफ कड़ा अभियान चलाया, बल्कि उनके परिवारों के माध्यम से उन तक सरकार की पुनर्वास नीति का संदेश भी पहुंचाया।
”यह राज्य में नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में एक टर्निंग पॉइंट है। भटके हुए युवाओं को यह समझ में आ रहा है कि हिंसा की राह में सिर्फ विनाश है। हम मुख्यधारा में लौटने वाले सभी लोगों का स्वागत करते हैं और सरकार की नीति के तहत उन्हें हर संभव मदद दी जाएगी।”
— अमित रेणु, एसपी, चाईबासा
भारी मात्रा में आधुनिक हथियारों का जखीरा बरामद
हथियार डालने के साथ ही नक्सलियों ने पुलिस के सामने आधुनिक हथियारों और कारतूसों का एक बड़ा जखीरा भी सौंप दिया। सुरक्षाबलों के मुताबिक, नक्सलियों द्वारा सौंपे गए हथियारों में शामिल हैं:
- इंसास एलएमजी (LMG): 01
- इंसास राइफल: 05
- एसएलआर (SLR): 09
- बोल्ट एक्शन रायफल: 01
- पिस्टल: 01
- मैगजीन: 31
- जिंदा कारतूस: 2,987 राउंड
इतनी बड़ी मात्रा में अत्याधुनिक हथियारों और गोलियों का सरेंडर होना यह साबित करता है कि नक्सली संगठन अब पूरी तरह से बैकफुट पर आ चुके हैं और उनकी सप्लाई लाइन और मारक क्षमता पूरी तरह ध्वस्त हो गई है।
पुनर्वास नीति का दिख रहा व्यापक असर
झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति ‘नई दिशा’ लगातार नक्सलियों को आकर्षित कर रही है। इस नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को न सिर्फ तात्कालिक वित्तीय सहायता दी जाती है, बल्कि उनके पुनर्वास, बच्चों की शिक्षा, और रोजगार के लिए भी पुख्ता इंतजाम किए जाते हैं।
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पुलिस महानिदेशक (DGP) कार्यालय से जारी एक बयान में अन्य सक्रिय नक्सलियों से भी अपील की गई है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर सरकार की इस कल्याणकारी नीति का लाभ उठाएं, अन्यथा सुरक्षाबलों का सख्त अभियान आगे भी जारी रहेगा। इस सामूहिक आत्मसमर्पण के बाद सुरक्षाबलों का मनोबल सातवें आसमान पर है, वहीं नक्सली खेमे में भारी हताशा देखी जा रही है।













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