छतरपुर-मेदिनीनगर मुख्य मार्ग पर सीलदाग बाकी नदी पुल के समीप हुआ हादसा
यात्री की पहचान जमुआ बिशुनपुर निवासी जितेंद्र भुइया के रूप में हुई
बसों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और लापरवाही को लेकर ग्रामीणों में भारी रोष
मेदिनीनगर (पलामू): पलामू जिले के छतरपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत मेदिनीनगर-औरंगाबाद मुख्य मार्ग (मेन रोड) पर सोमवार को एक बेहद हृदयविदारक सड़क हादसा सामने आया है। सीलदाग स्थित बाकी नदी पुल के समीप चलती बस के गेट से गिरकर एक युवक की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद से मृतक के परिजनों में कोहराम मचा हुआ है, वहीं पूरे इलाके में मातम का माहौल है।
प्राप्त विवरण के अनुसार, मृतक की पहचान जमुआ बिशुनपुर निवासी राजदेव भुइया के पुत्र जितेंद्र भुइया (25 वर्ष) के रूप में की गई है। सोमवार को जितेंद्र डाल्टनगंज से बस में सवार होकर अपने घर लौट रहा था।
गर्मी लगने की बात कहकर गेट पर आया था मृतक
प्रत्यक्षदर्शियों और बस में सवार अन्य यात्रियों के अनुसार, सफर के दौरान जितेंद्र को काफी बेचैनी और गर्मी महसूस हो रही थी। उसने सह-यात्रियों से भीषण गर्मी और उमस की शिकायत की और थोड़ी खुली हवा पाने के लिए वह बस के पायदान (गेट) के पास आकर खड़ा हो गया। इसी दौरान बाकी नदी पुल के समीप अचानक बस को एक झटका लगा, जिससे जितेंद्र अपना संतुलन खो बैठा। चलती बस का दरवाजा खुला होने के कारण वह सीधे सड़क पर जा गिरा।
चश्मदीदों का कहना है: “युवक इतनी तेजी से सिर के बल सड़क पर गिरा कि उसे संभलने का मौका तक नहीं मिला। गंभीर चोट आने के कारण चंद मिनटों में ही उसने दम तोड़ दिया। घटना इतनी अचानक हुई कि बस में चीख-पुकार मच गई।”
मौके पर जुटी भीड़, पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा
हादसे के तुरंत बाद घटनास्थल पर स्थानीय ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई, जिससे कुछ देर के लिए आवागमन बाधित रहा और अफरा-तफरी की स्थिति बनी रही। स्थानीय नागरिकों द्वारा छतरपुर थाना पुलिस को मामले की सूचना दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुंचा और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर कागजी कार्रवाई पूरी की और पोस्टमार्टम के लिए अनुमंडलीय अस्पताल भेज दिया।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल, सुरक्षा पर उठे सवाल
जैसे ही हादसे की खबर जितेंद्र के गांव जमुआ बिशुनपुर पहुंची, मृतक के घर में कोहराम मच गया। माता-पिता और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों ने ढांढस बंधाने का प्रयास किया, लेकिन इस असमय मौत ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है।
इस हादसे ने एक बार फिर यात्री बसों में सुरक्षा मानकों की पोल खोलकर रख दी है। स्थानीय ग्रामीणों और बुद्धिजीवियों ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए परिवहन विभाग और पुलिस प्रशासन के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया है।
- क्षमता से अधिक भीड़: ग्रामीणों का आरोप है कि रूट पर चलने वाली अधिकांश बसों में क्षमता से अधिक यात्रियों को ठंसा जाता है।
- खुले दरवाजे: नियमों के ताक पर रखकर चलती बसों के दरवाजे खुले छोड़े जाते हैं, जो अक्सर ऐसे हादसों का कारण बनते हैं।
- कंडक्टरों की लापरवाही: बसों के पायदान पर यात्रियों को खड़े होने से रोकने के लिए बस कर्मी कोई ठोस कदम नहीं उठाते।
स्थानीय निवासियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पलामू रूट पर चलने वाली सभी व्यावसायिक बसों में सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए, वाहनों की गति सीमा तय हो और चलती बस में गेट बंद रखना अनिवार्य किया जाए, ताकि भविष्य में किसी और मासूम की जान न जाए।













Leave a Reply