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व्यक्तित्व निर्माण और संस्कारयुक्त जीवन ही सच्ची विद्या: सच्चिदानंद

कोटखास के रामजानकी ठाकुरबाड़ी में पंचकुंडीय गायत्री महायज्ञ आयोजित, विद्यार्थियों का हुआ विद्यारंभ संस्कार और दीप महायज्ञ में लिया सद्गुणों का संकल्प

मेदिनीनगर ( पलामू ) : लेस्लीगंज प्रखंड के कोटखास स्थित ऐतिहासिक रामजानकी ठाकुरबाड़ी परिसर में रविवार को अखिल विश्व गायत्री परिवार के तत्वावधान में एक दिवसीय भव्य पंचकुंडीय गायत्री महायज्ञ एवं संकल्प कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत इस आयोजन में स्थानीय ग्रामीणों, महिलाओं, पुरुषों और भारी संख्या में छात्र-छात्राओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। वैदिक मंत्रोच्चार और शंखध्वनि के बीच पूरा परिसर भक्तिमय माहौल में सराबोर नजर आया।

​केवल डिग्री शिक्षा नहीं, संस्कार ही असली विद्या

​महायज्ञ के मुख्य वक्ता और शांतिकुंज, हरिद्वार से विशेष रूप से पधारे उप जोन समन्वयक सच्चिदानंद तिवारी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि मानव जीवन का सर्वोपरि और सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य व्यक्तित्व निर्माण होना चाहिए। उन्होंने आधुनिक शिक्षा पद्धति और संस्कारों के समन्वय पर जोर देते हुए कहा:

​”केवल डिग्रियां हासिल कर लेना ही सच्ची शिक्षा नहीं है। जब तक जीवन में नैतिक मूल्यों और संस्कारों का समावेश न हो, तब तक विद्या अधूरी है। संस्कारयुक्त जीवन ही मनुष्य को समाज और राष्ट्र के निर्माण में भागीदार बनाता है।”

 

​नन्हे कदम शिक्षा की ओर: विद्यारंभ संस्कार और सम्मान

​कार्यक्रम के दौरान गायत्री परिवार की वैदिक परंपरा के अनुसार दर्जनों छोटे बच्चों का ‘विद्यारंभ संस्कार’ वैदिक रीति-रिवाज के साथ कराया गया। अक्षरांभ के माध्यम से बच्चों को ज्ञान के मार्ग पर अग्रसर होने की प्रेरणा दी गई।

​इसके साथ ही, भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में प्रखंड स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को मंच पर मुख्य अतिथि एवं प्रबुद्ध जनों द्वारा प्रमाण-पत्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। बच्चों की इस उपलब्धि पर परिजनों और उपस्थित जनसमूह ने करतल ध्वनि से उनका उत्साहवर्धन किया।

​दीप महायज्ञ में बुराइयों के त्याग का संकल्प

​महायज्ञ के मुख्य चरणों की संक्षिप्त रूपरेखा इस प्रकार रही:

  • पंचकुंडीय हवन: यज्ञाचार्य के निर्देशन में यजमानों ने विश्व कल्याण और पर्यावरण शुद्धि की कामना के साथ गायत्री मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र से आहुतियां दीं।
  • संस्कार सत्र: व्यक्तित्व विकास, नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना और युवा पीढ़ी को भटकाव से बचाने के लिए विशेष मार्गदर्शन सत्र आयोजित हुआ।
  • दीप महायज्ञ (सायंकालीन सत्र): शाम के समय सैकड़ों दीपकों की रोशनी से परिसर जगमगा उठा। श्रद्धालुओं ने हाथ में दीपक लेकर समाज से कुरीतियों, व्यसनों (नशे) और बुराइयों को त्यागने तथा जीवन में सद्गुणों को अपनाने का सामूहिक संकल्प लिया।

​सामाजिक व धार्मिक कार्यकर्ताओं की रही सक्रिय भूमिका

​इस पूरे एक दिवसीय अनुष्ठान को सफल बनाने में स्थानीय गायत्री परिवार के सदस्यों सहित क्षेत्र के कई प्रतिष्ठित सामाजिक और धार्मिक कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई। व्यवस्था प्रबंधन से लेकर महाप्रसाद वितरण तक में युवाओं की टोली मुस्तैद दिखी। आयोजन समिति ने अंत में सभी आगंतुक श्रद्धालुओं और शांतिकुंज से आई टोली के प्रति आभार व्यक्त किया।

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