पटना : पटना जिले के अथमलगोला प्रखंड स्थित रामनगर दियारा क्षेत्र में बुधवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के तहत दवा खाने के बाद 38 बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। आनन-फानन में बीमार बच्चों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की टीम उनकी निगरानी कर रही है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, अथमलगोला प्रखंड के गणपत राय टोला प्राथमिक विद्यालय और नया प्राथमिक विद्यालय में स्वास्थ्य विभाग की टीम फाइलेरिया मुक्ति अभियान चला रही थी। दोपहर के समय मिड-डे मील (MDM) के बाद बच्चों को एल्बेंडाजोल की खुराक दी गई।
दवा लेने के कुछ ही मिनटों बाद बच्चों ने घबराहट, पेट दर्द और चक्कर आने की शिकायत की। देखते ही देखते कई बच्चों को उल्टियां होने लगीं, जिससे स्कूल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। शिक्षकों ने तुरंत इसकी सूचना स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को दी।
परिजनों का हंगामा और प्रशासन की कार्रवाई
जैसे ही यह खबर गांव में फैली, बड़ी संख्या में ग्रामीण और बच्चों के परिजन स्कूल पहुंच गए। बच्चों की हालत देख लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही को लेकर नाराजगी जताई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय पुलिस भी मौके पर पहुंची।
अस्पताल सूत्रों के अनुसार:
- कुल 38 बच्चों को इलाज के लिए लाया गया है।
- ज्यादातर बच्चों में ‘रिएक्शन’ के सामान्य लक्षण दिखे हैं।
- फिलहाल सभी बच्चे खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं, लेकिन उन्हें मेडिकल ऑब्जर्वेशन में रखा गया है।
विशेषज्ञों की राय: ‘रिएक्शन’ या ‘क्राइसिस’?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कभी-कभी पेट में कीड़े (Worms) होने की स्थिति में एल्बेंडाजोल जैसी दवाओं के सेवन से चक्कर या जी मिचलाने जैसी समस्या हो सकती है। हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में बच्चों के बीमार होने के कारण दवा की गुणवत्ता और खाली पेट दवा दिए जाने की संभावनाओं की भी जांच की जा रही है।
”बच्चों को प्राथमिक उपचार दे दिया गया है। स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। घबराने की बात नहीं है, मेडिकल टीम अलर्ट पर है।”
— स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारी














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