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आंगनबाड़ी सेविकाओं को कड़ी चेतावनी, एक सप्ताह में पोषण वाटिका और भवन मरम्मत कार्य पूर्ण करने का अल्टीमेटम

​मेदिनीनगर, पलामू :- बाल विकास परियोजना कार्यालय, मनातू ने क्षेत्र की आंगनबाड़ी सेविकाओं के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए आवंटित सरकारी राशि का उपयोग समय पर न होने और कार्य में लापरवाही बरतने को लेकर प्रखंड विकास पदाधिकारी सह बाल विकास पदाधिकारी (CDPO) मदन कुमार सुमन ने सभी संबंधित सेविकाओं को अंतिम निर्देश जारी किया है।

​आवंटित बजट और कार्य की स्थिति

​जानकारी के अनुसार, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, पलामू के निर्देशानुसार क्षेत्र के विकास हेतु भारी-भरकम राशि जारी की गई थी। इसके तहत:

  • ​पोषण वाटिका: कुल 47 आंगनबाड़ी केंद्रों को प्रति केंद्र 10,000 रुपये आवंटित किए गए।
  • ​भवन रख-रखाव: कुल 53 आंगनबाड़ी केंद्रों को प्रति केंद्र 8,000 रुपये की राशि प्रदान की गई।

​यह राशि सीधे सेविकाओं के संयुक्त पोषाहार खाते में हस्तांतरित की गई थी। हालांकि, समीक्षा के दौरान पाया गया कि अधिकांश केंद्रों पर कार्यों की प्रगति नगण्य है, जिसे विभाग ने गंभीरता से लिया है।

​’जियो-टैगिंग’ और ‘जीपीएस फोटो’ अनिवार्य

​भ्रष्टाचार और अनियमितता पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन ने इस बार कड़े मापदंड तय किए हैं। सीडीपीओ ने स्पष्ट किया है कि केवल कागजी खानापूर्ति से काम नहीं चलेगा। सेविकाओं को निम्नलिखित साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे:

    1. ​पोषण वाटिका: कार्य पूर्ण होने के बाद सेविका को वाटिका के साथ अपनी GPS लोकेशन युक्त फोटो और जियो-टैग प्रमाण देना होगा।
    2. ​भवन मरम्मत: रख-रखाव कार्य की फोटो के साथ-साथ अभिश्रव उपयोगिता प्रमाण पत्र संबंधित महिला पर्यवेक्षिका (Supervisor) के माध्यम से कार्यालय में जमा करना होगा।

​“सरकारी राशि का समय पर उपयोग न करना वित्तीय अनियमितता और दुरुपयोग की श्रेणी में आता है। यदि एक सप्ताह के भीतर साक्ष्यों के साथ रिपोर्ट जमा नहीं की गई, तो इसे गबन मानते हुए संबंधित सेविकाओं के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा जाएगा।”

— मदन कुमार सुमन, बाल विकास पदाधिकारी, मनातू

 

​कार्रवाई की चेतावनी

​प्रशासन के इस सख्त रुख से प्रखंड की आंगनबाड़ी सेविकाओं में हड़कंप मच गया है। विभाग ने साफ कर दिया है कि निर्धारित सात दिनों की समय सीमा के बाद किसी भी प्रकार का बहाना स्वीकार नहीं किया जाएगा। लापरवाही बरतने वाली सेविकाओं पर कानूनी गाज गिर सकती है और उनकी सेवा समाप्ति तक की अनुशंसा की जा सकती है।

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