रांची। झारखंड की राजनीति और विधायी प्रक्रिया अब एक नए युग में प्रवेश कर रही है। राज्य विधानसभा को पूरी तरह ‘पेपरलेस’ बनाने की दिशा में बड़ी पहल करते हुए राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन (NeVA) परियोजना को धरातल पर उतारने की तैयारी तेज हो गई है। वह दिन दूर नहीं जब सदन के भीतर विधायक भारी-भरकम फाइलों और कागजों के पुलिंदों के बजाय आधुनिक टैबलेट के साथ नजर आएंगे।
विधानसभा परिसर में आयोजित विशेष प्रशिक्षण शिविर के माध्यम से इस महत्वाकांक्षी योजना का आगाज हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधानसभा अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो ने विधायकों को तकनीक के साथ कदम ताल करने का मंत्र दिया।
मुख्यमंत्री ने किया ई-विधान सेवा केंद्र का उद्घाटन
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा में ई-विधान सेवा केंद्र का विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि देश तेजी से डिजिटल बदलाव की ओर बढ़ रहा है और झारखंड इस दौड़ में पीछे नहीं रहेगा। उन्होंने गर्व के साथ कहा:
”अब सदन के कमरों में कागजों के ढेर और फाइलों के बंडल इतिहास बन जाएंगे। यह झारखंड के लिए गर्व का क्षण है कि हम विधायी कार्यों को पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए तकनीक को अपना रहे हैं।”
हालांकि, सीएम ने इस दौरान साइबर सुरक्षा को लेकर आगाह भी किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीक जितनी सुविधाजनक है, उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी है, इसलिए सुरक्षा तंत्र को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता होगी।
46 विधायकों को मिले टैबलेट, 35 की रही अनुपस्थिति
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान उपस्थित 46 विधायकों को टैबलेट वितरित किए गए। इन विधायकों को डिजिटल माध्यम से प्रश्न पूछने, सूचनाएं देने और प्रस्ताव पेश करने की बारीकियां सिखाई गईं।
लेकिन, इस डिजिटल बदलाव के बीच 35 विधायकों की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही। गैर-हाजिर रहने वालों में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और संसदीय कार्यमंत्री राधाकृष्ण किशोर (दिल्ली प्रवास के कारण) समेत कई दिग्गज नाम शामिल रहे। कई विधायकों ने अपनी अनुपस्थिति का कारण क्षेत्रीय व्यस्तता बताया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अनुपस्थित विधायक इस डिजिटल दौड़ में पीछे छूट जाएंगे?
’बजट सत्र’ से होगा आंशिक डिजिटल आगाज
विधानसभा अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो ने जानकारी दी कि आगामी बजट सत्र से सदन की कार्यवाही को आंशिक रूप से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ले आया जाएगा।
- शून्य काल की सूचनाएं: अब ऑनलाइन स्वीकार की जाएंगी।
- पारदर्शिता: निर्धारित समय सीमा के भीतर पहले दर्ज होने वाली 25 सूचनाएं ही मान्य होंगी।
- सुविधा: अब विधायकों को सूचनाएं दर्ज कराने के लिए देर रात तक कतारों में लगने की जरूरत नहीं होगी।
NeVA: एक राष्ट्र, एक प्लेटफॉर्म
स्पीकर महतो ने कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य देश की सभी विधानसभाओं को एक प्लेटफॉर्म पर लाना है। इससे कार्यप्रणाली में एकरूपता आएगी और आम जनता भी सदन की गतिविधियों को डिजिटल रूप से ट्रैक कर सकेगी। यह कदम न केवल पर्यावरण के अनुकूल (पेपरलेस) है, बल्कि इससे सरकारी खर्च में भी कमी आएगी।
















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