मेदिनीनगर: कहते हैं कि अगर इरादों में जान हो, तो बेड़ियाँ भी रास्ता नहीं रोक सकतीं। कुछ ऐसा ही नजारा बुधवार को राजकीयकृत +2 उच्च विद्यालय, नीलाम्बर–पिताम्बरपुर (लेस्लीगंज) स्थित परीक्षा केंद्र पर देखने को मिला, तब पुलिस वैन से उतरे एक युवक ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। हाथों में हथकड़ी और चारों ओर पुलिस का पहरा, लेकिन चेहरे पर अपराधबोध से ज्यादा अपने भविष्य को संवारने की ललक थी।
विवाद ने पहुँचाया जेल, पर शिक्षा से रहा जुड़ाव
चतरा जिले के लावालौंग प्रखंड का रहने वाला महताब आलम पलामू के मजदूर–किसान महाविद्यालय, डंडार (पांकी) में इंटरमीडिएट (विज्ञान) का छात्र है। करीब 15 दिन पहले गांव में दोस्तों के साथ हुए एक मामूली विवाद ने हिंसक मोड़ ले लिया, जिसके कारण महताब को मारपीट के मामले में जेल जाना पड़ा। वर्तमान में वह चतरा जेल में बंद है, लेकिन जेल की चारदीवारी उसके ‘इंजीनियर’ बनने के सपने को धुंधला नहीं कर सकी।
कड़ी सुरक्षा के बीच संपन्न हुई परीक्षा
प्रशासन ने महताब के शैक्षणिक भविष्य को ध्यान में रखते हुए उसे परीक्षा देने की अनुमति दी। चतरा जेल से पुलिस के विशेष दस्ते के साथ उसे पलामू लाया गया। परीक्षा केंद्र के भीतर भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे। हथकड़ी पहने हुए ही महताब ने अपनी उत्तर पुस्तिका भरी। परीक्षा खत्म होने के बाद पुलिस उसे पुनः कड़ी सुरक्षा के बीच चतरा जेल ले गई।
”क्षणिक आवेश में हुई एक गलती ने मुझे सलाखों के पीछे पहुँचा दिया, लेकिन मैं नहीं चाहता कि मेरी शिक्षा का अंत यहीं हो जाए। मैं पढ़-लिखकर अपने परिवार का नाम रोशन करना चाहता हूँ।”
— महताब आलम, परीक्षार्थी
युवाओं के लिए एक बड़ा संदेश
यह घटना समाज और युवाओं के लिए एक दोहरी सीख है। जहाँ एक ओर यह बताती है कि एक पल का गुस्सा कैसे हंसते-खेलते जीवन को कानूनी पचड़ों में डाल सकता है, वहीं दूसरी ओर यह संदेश भी देती है कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी विपरीत हों, शिक्षा के प्रति समर्पण आपको एक नया अवसर दे सकता है।
परीक्षा केंद्र पर मौजूद शिक्षकों और अभिभावकों ने भी छात्र के इस जज्बे की सराहना की। लोगों का मानना है कि जेल से निकलकर परीक्षा देना यह दर्शाता है कि सुधार की गुंजाइश हर जगह होती है।












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